वो आँगन याद आता है

वो आँगन याद आता है

वो आँगन याद आता है, वो तुलसी याद आती है
जहाँ खेले थे बचपन में, वो मिट्टी याद आती है

कभी शहनाई बजती थी तो उसकी याद आती थी
और अब शहनाई बजती है तो बेटी याद आती है

वो अपना घर हो या होटल हो या ढाबा हो रस्ते का
कहीं रोटी महकती है तो माँ की याद आती है

बहुत हस्सास होकर जिसने मेरी परवरिश की थी
वो चश्मा याद आता है, वो लाठी याद आती है

पिता ने किस तरह घर के मसाइल हल किए होंगे
मैं इस पर गौर करता हूँ तो नानी याद आती है

कोई भी दिन नहीं ऐसा कि जिस दिन ये नहीं होता
घड़ी जब बाँधता हूँ मैं तो राखी याद आती है

सिखाया था धड़कना जिसने मेरे दिल को दिल देकर
मुझे तन्हाई में अब भी वो लड़की याद आती है

किसी को भूलना मेरे लिए मुमकिन नहीं शायद
मैं जब फुरसत में होता हूँ तो सबकी याद आती है।


Image : The Broken Pitcher
Image Source : WikiArt
Artist : William-Adolphe Bouguereau
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अशोक मिजाज द्वारा भी