जुल्म ऐसे कि वो ढाते हुए थक जाते हैं

जुल्म ऐसे कि वो ढाते हुए थक जाते हैं

जुल्म ऐसे कि वो ढाते हुए थक जाते हैं
और हम खुद को बचाते हुए थक जाते हैं

क्या मनाएँगे किसी गैर की रूठी किस्मत
वो जो खुद ही को मनाते हुए थक जाते हैं

अपने अहसान गिनाते हुए थकते ही नहीं
वो जो अफसोस जताते हुए थक जाते हैं

वो कशिश उनमें है, जब सामने होते हैं हम
अपने अरमान छुपाते हुए थक जाते हैं

क्यों बरस पड़ते हैं बादल न ये पूछो लोगो
ये भी रिश्तों को निभाते हुए थक जाते हैं।


Image : Surveying the Vista
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Artist : Anders Zorn
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