ऋणजल धनजल : बावजूद जीवन
‘दिनमान’ साप्ताहिक में यह रिपोर्ताज धारावाहिक रूप में लोगों के बीच आता है। रेणु की यह अद्भुत कृति गवाह है पटना की बाढ़ और दक्षिण बिहार के सुखाड़ का, वहीं दूसरी ओर सत्ता में बैठे लोगों की मनःस्थिति और उनके काले करतूत का भी। वे मनुष्य बने रहने पर बल देते हैं। वर्तमान में जिस प्रकार से गाँव और शहर के बीच एक अंतर दिख रहा है उस ओर भी रेणु की यह रचना संकेत करती है।