ऋणजल धनजल : बावजूद जीवन
Last Journey by Vasily Perov- WikiArt

ऋणजल धनजल : बावजूद जीवन

‘दिनमान’ साप्ताहिक में यह रिपोर्ताज धारावाहिक रूप में लोगों के बीच आता है। रेणु की यह अद्भुत कृति गवाह है पटना की बाढ़ और दक्षिण बिहार के सुखाड़ का, वहीं दूसरी ओर सत्ता में बैठे लोगों की मनःस्थिति और उनके काले करतूत का भी। वे मनुष्य बने रहने पर बल देते हैं। वर्तमान में जिस प्रकार से गाँव और शहर के बीच एक अंतर दिख रहा है उस ओर भी रेणु की यह रचना संकेत करती है।

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 मेरे अंदर गाँव बसता है
Unidentified village in India - DPLA - 8c9672bf53e9511aa9dd943d4075c3f6.jpg- Wikimedia Commons

मेरे अंदर गाँव बसता है

अँग्रेजी के विरोध का कारण है। अँग्रेजी अच्छी आनी है तो मातृभाषा के माध्यम से ही आ सकती है। मैं केवल भावुकतावश नहीं कह रहा हूँ। भाषा-विज्ञान विषय भी मेरा था। इसका मूल सिद्धांत यही है कि आप मातृभाषा में ही अच्छा सोच सकते हैं। सृष्टि का आकलन दुनिया का हर देश इसे मानता है

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खानाबदोशी

इस खानाबदोशी में धूप से बचने के लिए मुझे एक छाते की दरकार थी जबकि सारे रंगीन छाते मुल्क के बादशाह के महल में सजाकर रखे गए थे

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हरिवंश राय ‘बच्चन’ के वे पत्र

बच्चन के अनगिन पत्र शिवपूजन सहाय साहित्य-समग्र में भी प्रकाशित हैं जिनमें उनके लिखे दो पत्र मेरे नाम से भी हैं

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 प्रश्न
Image name: Cloud Study Image Source: WikiArt Artist: John Constable This image is in public domain

प्रश्न

जो बदल दे आप अपना पाट, अपना द्वार यह संबंध क्या वैसी नदी है? और फिर इन बादलों की तरह नित घिरना, बरसना और छँट जाना क्या नहीं आकाश की यह त्रासदी है?

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 आना फिर…!
The Undergrowth in the Forest of Saint-Germain by Claude Monet- WikiArt

आना फिर…!

सचकहीं कुछ भी नहीं थाबस हवा के पाँवपत्थर हो गए थेतड़पकर रह गए थे शब्दमन के हाशिये परकाँपते लब परछुटता-सा जा रहा था

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