वह लौटेगा
वह जन्मेगा बार बार राजपथ की कंकरीली छाती चीर कचनार दूब की तरह!वह गाएगा क्योंकि गाना ही सभ्यता की
वह जन्मेगा बार बार राजपथ की कंकरीली छाती चीर कचनार दूब की तरह!वह गाएगा क्योंकि गाना ही सभ्यता की
फूलों के परिधान पहन जब-जब सरहुल आता है माँदर, ढोल, नगाड़े बजते जंगल भी गाता है पाँवों में थिरकन, तन में सिहरन आँखों में ख्बाब!
मैं मौन हूँ, मैं खामोश हूँ, मैं चुप हूँ चराचर जगत डूबा गहन सन्नाटे में मैं अनंत शून्य हूँ आकाश समेटे धरा पर
भारत को ब्रिटिश औपनिवेशिक तंत्र की गुलामी से मुक्ति की घोषणा के बाद इसका सामाजिक-राजनैतिक एवं धार्मिक स्वरूप क्या हो या कैसा हो, इस पर राष्ट्र निर्माता एवं युग-द्रष्टा बाबा…
गणेश, गधा और मध्य प्रदेश अंत तक एक सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति के द्योतक बन जाते हैं। गधा से मंदबुद्धि वालों की ओर तथा गणेश से बुद्धिमानों की ओर संकेत है।
अँधेरा कम नहीं होता हर सीटी खत्म करती है एक इंतज़ार धीरे-धीरे ऊँघने लगते हैंसभी सवाल निरूत्तर से!