घर खाली न दिखे
गरहे में पानी खेतों की जोत दिखाई दे वहाँ बात करती हँसती हुईं झुंड में लड़कियाँ और लड़के लगा रहे हों कहकहे
गरहे में पानी खेतों की जोत दिखाई दे वहाँ बात करती हँसती हुईं झुंड में लड़कियाँ और लड़के लगा रहे हों कहकहे
जीस्त में कुछ कर गुजरने के लिए आश्नाई खुद से भी दरकार हैदर्द, गम, हसरत, मसर्रत से भरा दिल हमारा दिल नहीं बाजार है
नाव क्यों उसके हाथों सौंपी थी नाखुदा तो खुदा नहीं होतातप नहीं सकता दु:ख की आँच में जो खुद से वो आश्ना नहीं होता
लड़की का बाप सीधा-सादा आदमी था। एक बार भाग कर गया तो दुबारा नहीं आया। उसका चाचा इधर-उधर से रमेश के पिता जी पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में हारकर बैठ गया। रमेश के अपहरण का जो केस बना था वह चलता रहा। लड़की वालों की तरफ से भी दहेज उत्पीड़न का एक फर्जी केस लगा दिया गया।
गुमशुदा कुछ होता रहा है सदियों से तो एक घर गुमशुदा होता रहा है ताखे पर जिसके किताबें रखी होती हैं नज्मों की
वेदनाएँ दस्तकें देने लगीं इतना मत इतराइए उल्लास परजो हो खुद फैला रहा घर-घर इसे पाएगा काबू वो क्या संत्रास पर