जीवन का व्यापार
बीत गए जो दिन, उनका है आँसू ही आभार! सखि, यह जीवन का व्यापार!
बीत गए जो दिन, उनका है आँसू ही आभार! सखि, यह जीवन का व्यापार!
उस दिन की ट्रेन-यात्रा में आराम से बेंचों पर बैठकर खुली खिड़की से प्राकृतिक दृश्यों का उपभोग करने का अवसर यात्रियों को नहीं मिल पाया था। भीड़, सो भी भयानक भीड़।
संसार की सृष्टि के बाद भगवान के सामने प्रश्न उठा, हर एक प्राणी को कितने वर्ष की आयु दे दी जाए? उसने पहले यह सोचा कि, सभी प्राणियों को समान वर्ष की आयु दे दी जाए। इसके बाद उसके सामने सबसे पहले गधा आ गया।
हिंदी राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन हो गई। जो लोग किसी और भाषा को राष्ट्रभाषा के पद पर बैठाना चाहते थे उनके सपने टूट गए।
यह धरती अधिवास युगों से यही हमारी परिजन फूले-फले कि जैसे मधुवन क्यारी