आधी हकीकत

समीर जैन उन लोगों में से था जो पक्की नौकरियों में ऊबते हैं और कच्ची नौकरियों से आकृष्ट होते हैं। भारत सरकार के भाषा विभाग

और जानेआधी हकीकत

बहुत ज्यादा है

मुझे मालूम है मेरी है सियततुम्हारे बराबर नहीं है किसी भी मामले मेंऔर न ही तर्क-वितर्क गुणा-गणित लाभ-हानि के आधार पर आदमियों

और जानेबहुत ज्यादा है

नदी नहीं बहती

खूब नहाते थे उसमें जब पानी का बहाव कम होता था चरती थी नदी के ढावा के ऊपर हमारी बकरियाँ गायें, भैंसें और हम सभी ग्वाल नदी

और जानेनदी नहीं बहती

भूलने के विरुद्ध

खोया है सभी ने कुछ न कुछ तो। तसल्ली है या नियति? भूलना होगा मुझे भी पीछा करती पुकारें, कौन पत्थर बनना चाहता है?

और जानेभूलने के विरुद्ध

कन्हैयालाल नंदन से वे अद्भुत मुलाकातें

उपन्यास पूरा हुआ तो मैंने नंदन जी से कहा, ‘आप पत्रकार हैं और यह पत्रकारिता पर लिखा गया उपन्यास है।

और जानेकन्हैयालाल नंदन से वे अद्भुत मुलाकातें