तलाश करते हैं
आपकी हद तलाश करते हैं अपना दिल पाश पाश करते हैंपत्थरों को तराश कर क्यूँ लोग देवता को तलाश करते हैं
आपकी हद तलाश करते हैं अपना दिल पाश पाश करते हैंपत्थरों को तराश कर क्यूँ लोग देवता को तलाश करते हैं
पत्थर को पिघलने में अभी वक्त लगेगा अंदाज बदलने में अभी वक्त लगेगाबेवक्त भला रात कहाँ जाएगी आखिर सूरज को निकलने में अभी वक्त लगेगा
सिर्फ उम्मीद पर टिकी मिट्टी कुछ नये ख्वाब देखती मिट्टी उड़ लो जितना यहीं पे आओगे कह रही है जमीन की मिट्टी
न अब पानी को पानी कह रही है नदी अपनी कहानी कह रही हैउदासी को समेटे बूढ़ी अम्मा ये दुनिया आनी जानी कह रही है
मँडराने लगते हैं ख़तरे उनके अपने होने पर झोपड़ियाँ घुटने लगती हैं एक महल की आमद से
आगे बढ़ने की ललक में किसने देखा लोग कितना पीछे छूटे जा रहे हैंहमने रिश्तों के लिए दौलत कमाई अब उसी दौलत से रिश्ते जा रहे हैं