आधी हकीकत

समीर जैन उन लोगों में से था जो पक्की नौकरियों में ऊबते हैं और कच्ची नौकरियों से आकृष्ट होते हैं। भारत सरकार के भाषा विभाग

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बहुत ज्यादा है

मुझे मालूम है मेरी है सियततुम्हारे बराबर नहीं है किसी भी मामले मेंऔर न ही तर्क-वितर्क गुणा-गणित लाभ-हानि के आधार पर आदमियों

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नदी नहीं बहती

खूब नहाते थे उसमें जब पानी का बहाव कम होता था चरती थी नदी के ढावा के ऊपर हमारी बकरियाँ गायें, भैंसें और हम सभी ग्वाल नदी

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भूलने के विरुद्ध

खोया है सभी ने कुछ न कुछ तो। तसल्ली है या नियति? भूलना होगा मुझे भी पीछा करती पुकारें, कौन पत्थर बनना चाहता है?

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मुझे छिपाओ मत

चारों चरण सृजन के हैं आत्मनेपदी ही परस्मैपदी तो प्राण-प्रतिष्ठा से होते हैं। जड़-जंगम के बारे में अनजान फतिंगे गूलर फल में जन्मे, जगकर भी सोते हैं।

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सारे गम तू गा

सारे गम सिर से उतारकर सारे गम तू गा। रूखी धरती पर गंगा-सी हरियाली तू ला।बदल आज के आज मुहर्रम वाले ये चेहरे घुसपैठों का नया सिलसिला चोंच मार ठहरे न्यायालय में मृतक न्याय की प्रेतात्मा नाचे और फिरंगी भूत बजाए तबला ताधिन्ना।

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