सामने
आज भी सुबह आठ बजे से राहगीरों को ताकते हुए ग्यारह बजे चले थे। मजदूरी को तलाशती उसकी आँखों में मजबूरी पानी बनकर उभर आई थी।
आज भी सुबह आठ बजे से राहगीरों को ताकते हुए ग्यारह बजे चले थे। मजदूरी को तलाशती उसकी आँखों में मजबूरी पानी बनकर उभर आई थी।
बात काफी पुरानी है। टाइप राइटर चलन के बाहर नहीं हुए थे। कचहरी, नगरपालिका के बाहर और दफ्तरों में इनकी खटखटाहट गूँजती रहती थी।
उम्र बहुत दयावान होती है। आदमी के बालों को सफेद कर देती है ताकि लोग उसको बुजुर्ग और तजुर्बेदार समझें। नजर को धुंधला कर देती है
जोरावर सिंह का दिमाग एकबारगी खाली हो गया। डी.वाई.एस.पी. के रूप में यह उनका पहला छापा था और पहला ही फुस्स!
हिंदी कहानी की जब भी चर्चा होती है तब यह भी विचार-विमर्श का केंद्र हो जाता है कि उसकी उम्र क्या है? कुछ विचारक उसका उत्स वेदों उपनिषदों तक ले जाते हैं तो कुछ उसे मात्र शतायु मानते हैं।
राष्ट्रवादी लेखक और विचारक इस बात से चिंतित थे कि आदि हिंदू आंदोलन के प्रभाव में आकर अछूत अपने पृथक धर्म के रास्ते पर चलकर कहीं अपना अलग धर्म खड़ा ना कर लें।