मूढ़ी वाली मौसी

मूढ़ी वाली मौसी

शरीर से स्थूल, वय से चालीस के लगभग! रूप भद्रतापूर्ण। आँखें वेदनामयी। धोती साधारण–न मैली न उजली। हाथों में चाँदी की चूड़ियाँ। माथे पर एक टोकरी लिए जब वह आती है, तो हमारे छात्रावास में मौसी-मौसी की धूम मच जाती है।

उसकी चाँदी की चूड़ियाँ उन बीते दिनों की याद दिलाती जबकि वह दांपत्य जीवन के सुखों से दैव द्वारा वंचित कर दी गई। लेकिन उसी दैव ने उसके जीवन पथ पर एक दीपक भी दे छोड़ा जिसे देखकर वह बीते दिनों के धुँधलेपन को कम कर सके। लेकिन उसे एक लड़के की माँ बन कर रहने में संतोष नहीं हुआ, चली वह सैकड़ों की माँ बनने।

आज करीब पंद्रह वर्षों से हमारे छात्रावास में वह कितने छात्रों को मातृत्व सुख दे यशोदा वाला दही और माखन खिला कर कर्तव्य-पथ पर अग्रसर कर रही है। उनमें से बहुतों को इज्जत की कुर्सी पर बैठे देख वह अत्यंत सुख का अनुभव करती है। आज हम भी उससे छात्रावास के बीते दिनों का इतिहास सुनकर बहुत कुछ प्रेरित होते हैं।

यद्यपि इसकी टोकरी में हम मूढ़ी, लड़ुआ और दही के अलावा और कुछ न पा सकते, फिर भी सप्ताह में एक दिन वह माँस और रोटी भी मनचले छात्रों की इच्छापूर्ति के लिए लाती है। तीज की खज्जी वह भले न हमें खिला सकी हो, पर समय-समय पर छठ का पकवान और देवघर का पेड़ा आदि प्रसादी देकर अपने मन के भार को वह हलका करना चाहती है।

आज के युग के अनुसार उसमें हम एक अवगुण यह पा सकते हैं कि वह रुपए में तीन अठन्नी बनाना नहीं जानती। पर रुपए में दो अठन्नी बनाने में भी वह संकोच करती और सोचती, हाय! ये चंद चाँदी के टुकड़े मुझे कहीं मौसी के पद से च्युत न कर दे।

इसी ईमानदारी के पैसे से वह तीर्थाटन करती जो कि एक हिंदू-विधवा के लिए मुक्ति का परम साधन है। हम छात्रों के संसर्ग से इसने विद्या के महत्त्व को भी जाना है और अपने बुढ़ापे की लाठी के समान सहारा पाने की लालसा से अपने एकलौते लाडले के लिए एक शिक्षक रखकर उसके पठनपाठन पर विशेष ध्यान देती है।

जब वह हम लोगों को लबरा बाबू कहती, तो हम अपने घरों से कोसों दूर रहने पर भी मातृत्व के प्यार का अनुभव करते हैं। अगर उसकी टोकरी में उससे छिपाकर किसी को हाथ देते देख लेती है, तो मुस्कराने के सिवा वह बोल ही क्या सकती है?

अपने चारों ओर लड़कों के झुंड को देख कर वह कभी भी वैधव्य-यंत्रणा से पीड़ित नहीं दिखाई पड़ती।


Image: Mother with Two Children
Image Source: WikiArt
Artist: Egon Schiele
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राजकिशोर सिंह किशोर द्वारा भी