कवि इश्रती

कवि इश्रती

स्वभावतया अनुसंधान और शोधकार्य में जुटे रहने और जन श्रुतियों के समुंदर से रत्नभंडार संचित करने में श्री राहुल सांकृत्यायन का नाम अग्रणी है। यों तो उनकी लेखनी से हर तरह की चीजें निकली हैं लेकिन प्रस्तुत लेख उनकी उपरोक्त प्रवृत्ति की झलक हमें दिखाता है।

सैयद मुहम्मद खाँ इश्रती के पिता युसूफ हुसैनी और पितामह सैयद हुसैन थे। सैयद यूसुफ भाग्य-परीक्षा करते बसरा (मेसोपोतामिया) से दखिन पहुँचे। इश्रती अभी 12 ही साल का था, कि उसके पिता का देहांत हो गया। किंतु वह पूज्य सैयद या मुसलमानों के ब्राह्मण-वंश की संतान था, इसलिए उसकी शिक्षा-दीक्षा में बाधा नहीं पड़ी। बीजापुर दरबार में इश्रती का काफी सम्मान था। जब (1686 ई.) बीजापुर को औरंगजेब ने अपने राज्य में मिला लिया, तो उसके दरबार में भी इश्रती को बहुत सम्मान मिला। इश्रती दखिन का अंतिम महाकवि है। उसके तरुण समकालीन वली औरंगाबादी को हम दखिनी और उर्दू का सम्मिलित कवि मान सकते हैं। इश्रती की कब्र हैदराबाद गाजीबंडा दरवाजा के बाहर शाहराजू हुसेनी की समाधि के उत्तर में है। इसके खानदान के लोग अब भी हैदराबाद में मौजूद हैं।

इश्रती की कृतियों में ‘चित-लगन’, ‘दीपक-पतंग’ और ‘नेहदर्पन’ अधिक महत्त्व रखती हैं, उनसे उसकी कविता के नमूने दिए जाते हैं।

पुत्र-वियोग (दीपक-पतंग)

बेचारी हो रही तब बेचारी वो माई। बेचारयाँ नमन1 वो कसूँ रो2 हाय हाय॥

लहू घूट भरके सीने में खार3। कली के नमन4 दिल रखी नहुँ-तलार5

चंदर घर के घन की हटीली वो नार। निकल राज के गम सों आई बहार6

सुना मार सिर पीट के हाय-वाय। चंदर में परा धर अँजूं7 जल नहवाय8

कि ऐ गुल9, मुजे आग तुज बिन है वन। कि घर तुज सजन बिन दिसे ज्यों सजन॥

जगत्तर10 में तुजसों मेरा नाम है। कि तुज सूर11 बिन दिन मेरा शाम है॥

तुसों12 खाय हसत13 मेरे लालज़ार14। बगैर तुज है मुँज सेज में फूल खार15

ए तुजसो मेरे हौज़16 में नीर है। तेरे-बाज17 नित खाक18 मुंज-सीर है॥

ए तुजसों मेरा हासिल19 हर मुद्दआ20। अगिन तुज बिना मुजकु बादेसबा21

तुसों वख्त22 है जेर23 मुज जोर24 में। है तुज वाज आराम मुज गोर25 में॥

ए तुज शमाते बजत26 अनवार27 है। वगैर तुज मेरे दिलमने नार28 है॥

ए तुजसों च है मुजकुं राज हारे नियाज29

न हो बेकटर30 सुट31 के मुज दिलपो खार। जुदाई के पर्दे का ना छोड़ तार॥

न कर बेवफाई32 वफादार हो। मेरी देख ज़ारी न बेजार33 हो॥

हवस34 इस सफर की तुँ सुटदे एताल35। नहीं तो, ले चल मुँजकुँ अपने दु बाल36

मुँजे जबह कर नें तो कैं मूँदकर। अगर्चे न होय तन लहू बूँद भर॥

क्या राज़ ऐ छंदभरी नाज़नीं37। डुवाया अँजू-जल में अब घर के नीं॥

प्रेम-पत्र

लिख्या दिल के लहू सों यो नामा38 तुजे। जो तुज बिन दिस्या दिन कयामत39 मुजे॥

तेरी जुल्फें-मुश्की40 की सौगंद है। खबे-खब में जिस जिव का एक बंद है॥

कि जबते अँख्याँ लहू भरयाँ ना सबूर41। रह्या है तेरे मुखके फुलवन सों दूर॥

तधाँते डब्या लहुमें लाले-नमन42। जो अजबस43 सुटी लहुकी अँजुयाँ44 नयन॥

लग्या इस रविश45 बहने लहुका नई। कि गैरत46 ले जाता है इस घर कहीं॥

पवन शाहिद47 है हारे सितारे गवाह। कि मुंज दिल की तंगी पे कर यक निगाह।।

समज सच तु दो दिन के बिछड़े का रोग। मुंज आशिक-उपर जिन सुटया48 प्यास भूक।।

जो दिसता है सूरज अगिन का कुवाँ। है मेरे कलेजे की आग का धुवाँ।।

पिरित कूँ खलल49 क्या है इस बात सों। जो मुँज-दिल की दर्पन में सो रात सों।।

सुटया50 जानो तेरी पिरित51 का खियाल।। भी किस-हुब का नक्श52 उसमें पड़ना महाल53।।

मुलेक दिलका तुजसों-च पाया है रुच54।  किसी का हुकुम ना चले इसमें कुछ।।

तेरा बिरह में सरसरी हारे निबल। कि जावे मेरे सिरसों भी कैं निकल।।

बिना आजिजी55 नै जो आशिक कुँ लाभ। तो अब बात कूँ ना बढ़ा बेहिसाब।।

न चूक्या जो उसकूँ भी चूक है कि जान। पशेमाँ56 हुँ मेरा उजर57 टुक्क मान।।

आपस की खता हारे खुदी58 का हरफ। नयन-जलसों धोकर किया बर-तरफ59।।

भला है जो अब पढ़यो नामेकुँ बेग। कि ज्यों पर पतिगे-लग हर्फा कुंबेग।।

सपंद60 हो जले मुँज-अगिन सों नुकत61। धुआँ62 ऊद63 का त्यों निकलता फ़क़त।।

चंदर त्यों यो सूरजसों ना मुख फिरा। न धर जीभ पर कुछ भला हारे बुरा॥

गिले हारे झगड़ेकुँ सब छोड़कर। सराकेद64 अपसका इधर मोड़कर॥

तमाशा मेरे चखके चश्मे का देख। कि क्यों कर बहता है तेरा विरह सेक॥

तेरा मुख देखें मुख अंजुबाँ65 सों धो। हुआ ताँत तन क्यों निपट…॥

अगर मकड़ी मुज-तन पे जाला तने । मखी त्यों मैं ना हिल सकूँ उसमने66

चले चिम्टी67 मुज बंद-पावों उपर। छुड़ा ना सकूँ हिल अपन ठाँव सों॥

वचन विन परन-सों मेरा तन एता। न पावे कभी कोई ढूँढ़े जेता॥

मेरी धड़कुँ हिलने बजुज68 खाक69 सों। न कोई काम70 सकता है इदराक71 सों॥

इलाही नरम कर तुँ वह संगदिल72। देवे मोमियाई73 मया74 की वो मिल॥

भर उसके गुसे की अगिन की बला। कि जाली है जिन मेरे जिवका घुला।।

बुझा वस्ल75 का जल छनक76 आसपास। बजुज़ इसके नै कुछ मुज दिलका आस।।

कलम दो जबाँ हुई या घावाँ सेती। मू उसका मेरे दुखकी आहाँ सेती।।

हुआ काला ज्यों तेरी मुश्की77 अलक। तो या दुख अँगे लग सके काँ तलक।।

सहेलियों द्वारा स्नान-निमंत्रण

अवल सब जन्या जाके पद्मिन के घिर78। अदबसों79 रख्याँ उसके पाँवाँपो सिर॥

जोबन के मेहर80 सों थी उन मन में उमंग। दर्या जोश-दिल का जवानी तरंग॥

कयाँ “तुजते ऐ शहपरी81 नेकनाम। सिख्या हंस चलन हारे सनोवर कयाम82

यों दो दिन की दुनिया में दुख सब बिसार। आनंद करले सुट83 फिक्र-गमते बहार84

कि कल-परसों की आस है चुप हवस। खुशी जगमें हमना यही दम है बस॥

किसे क्या ख़बर है कि यो आसमाँ। रच्या क्या है पर्दे में बाजी85 निहाँ86

हो गमते मुक्त कर लेवें कुच्छ आज। सुबा किन देख्या है धरें रुच87 आज॥

सुबा सासुरे जाएगी नेह जोड़। चले जब सगे हारे माँ-बाप छोड़॥

हमें तो पिछे गममें रहना-च है। बदल गुलके88 सो खार89 खाना-च है90

वह अछ बल चंचल नार सुध-ज्ञान धर। सहेल्याँ की सुन वो वचन कान धर॥

नजाकत91 सों दिल नैन का नीर कर । कदम सर्द चखपो पानी के धर॥

सुरज के नमन92 जल में डूब शहपरी। सदफत्यों93 जलद मोतियाँ सों भरी॥

डुब्याँ जल में कमके सकल हूरजाद94। हुयाँ शाद95 पायाँ जो अपनी मुराद॥

डूब उस हौज में शौक से खेल्तियाँ। अगिन तनपो पानी ठंडा मेल्तियाँ96

कलूलाँ उचा जल यकस्यक पो मेल97। अपस दिल की आतिश पो सुटत्याँ तेल॥

विवाह भोज

बिछाये चाँदनी का फर्श निर्मल। कि जैसा चाँदनी म्याने सफा जल॥

बिछाये सुजनिया जरवाफ98 के साफ। है उस गुलपर सुरज बुल्बुलकु इन्साफ॥

रुपेरी और सुनेरी मस्नदाँ पर। सदरमुहरी99 रखे ज्यों सूर-चंदर॥

अथे बरदार तकिये बर्निया बाफ100। परियाँ के गाल जैसे नाजुक101 हारे साफ॥

सुरंग असमानगीरयाँ थी शफक102-सी। अथी गुलदार103 ज्यों घन के तबक104-सी॥

लताफत105 का हुआ गुलशन वो मंदिर। दीवार-गिरीयाँ के खींचे बाड़ क्यों फिर॥

रखे फूला सों भर उस ठार गुलदान106। रखे थे पान सेती भर तंबूलदान॥

जड़ित के शमांदाँ में शमा107 का नूर108। नवे चंद त्यों लगन में घन के पुरनूर॥

महाफी109 थे चिरागाँ साथ पुरनूर। दिसे थे नयन में हो रयन के सूर॥

कंदीलाँ के देखत झोंक सोहाने! अंगूराँ के झड़े खुशियाँ के दाने॥

दिव्याँसों कटघरे ऐसे सँवारें। कि ज्यौं कौसेकजा110 म्याने111 सितारे॥

जो आ याकूत112 की प्याल्याँ में घाले। कि ज्यों मांकासों बाल्याँ कूँ सँवारे॥

तबक-बिल्लारे113 की खुश्बूय से भर। हजाराँ चाँद थे ज्यों भुईं के ऊपर॥

दिये थे मंडपाँ चौघेर114 याँ रात। कि घन उस चह्ल ज्यों बादल किया मात॥

कमर115 का दौर दिसने में ना आये। वह प्याले बदर116 से भर भर दिखाये॥

हरीफाँ117 झेलते जो जाय अधन तर। करें चौगान-बाजी ज्यों हवापर॥

हवस118 के जो तुरंग कूँ खूब दौड़ाय। गरम हो लालकर मू-खूय119 भर लाये॥

दिसँ रुख120 लाल पर बुँद-खुय121 के सारे। शफक122 है चाँद पर तिसपर सितारे॥

हुई जब मै123 सों दिलकूँ शादमानी124। तमाशे की मँगे दिल कामरानी125

शब्द शीरीं सेती होवे बहुत सुख। परीरुख126 दिलरुबा127 सों होइ भजन सुख॥

उनन आवाज के शोले128 पे रख दिल। पतंग होइ घनपो जोहरा129 वन में कोयल॥

बुलंद-आवाज पर उनके रख्या ध्यान। चंदर हारे सूरसों घन के खुले कान॥

बजंतर ता पड़ा जब नचन आयँ। अजायब130 दिलरुबाई के गताँ लाय॥

वो जुल्फा मुख-उपर अपने जो खोले। थे दिलेउश्शक131 के डसने सँपोले॥

नयन-मटकाई जो हरयक मदन-मस्त। सितारे घनते उसे देखत हुये पस्त॥

उँची गरदान132 कर जब भाव बतलाय। तलबदारा133 के दिल चौंदी ले जाय॥

छबेल्याँ छवसेती जब चर्ख में आये। भँवर तिस झल सों गोते जल में खाये॥

ढलक्त्याँ रक्स134 में आकर सलक135 जायँ। गताँ सीमाब136 के छंदों सो दिखलायँ॥

कर्या रक्कास137 हो आशिक दिलेबाग138। धरयाँ मोराँ के तनपर रश्क139 का दाग॥

तमाशा देख जब नैना अघाये। कँदूरी140 पार141 कर खाना खिलाये॥

भोज

जो कुछ खाने की होवे चीज बेहतर। चुनी थी सब चतुर ज्ञानी विचित्तर॥

रिकाब्याँ  भर रखे थे सो कबूली। तबीयत142 ने उसे अव्वल143 कबूली144

तसज्जन145 का अथा ले खूब महका146। खुल्या था वन में गोया हारीसंगार147

जिलेबियाँ बीच खुश्का148 साफ भरलाय। है गुलचीनी वो अछली को कह्या जाय॥

मसालादारे खिचड़ी थी सोहानी। खिला दिल देख तिस रंग जाफ़रानी149

थी नानाँ150 बीच किसमीसी अरूसी151। करन मेहमान के तें दस्तबोसी152

खुल्या था मूँ हरेक बर्फी153 संबोसा154। देवन मेहमान के लवताईं बोसा155

कमाँचाँ सों हुई मुद्दे मुकाबिल156। करन यो बह्स157 जो है कौन फाजिल158

सुलह कारन159 उनत्र सीनेपो रख हात। मलाई मूँ में मेहमाना कर यक बात॥

रखे रंगीन कलई160 नादिर161 हर ठार। अचाराँ हारे मुरब्बे ले मजादार॥

दिसें यों तैरते घिउ में चुकंदर। बचे सुरख़ाब162 के ज्यों नीर अंदर॥

सफाई सों करम163 रखते करामात164। उनकी गर्मजोशी165 थी हरेक साथ॥

कदू की हुई थी गर्दन-फराजी166। न थी रगबत167 कुं उसते बेनियाज़ी168

करेली हारे चँचाड़ी169 जो रखे ला। कंदूरी170 का हुआ सरसब्ज171 मंडवा॥

दिस्या खुश-रंग नजराँतल172 निचाला। जल इस फल173 सों हुआ रैहान174 काला॥

देखत तिस सब्ज175 रंग महबूब जाना176। हुआ मेथी-उपर दोना दिवाना॥

कली दिल की गिरह कुफ्त्या177 ने खोले। अंगूराँ खाय तिस झल178 के गलोले॥

जो प्याला दाल का सफरे179 पो आया॥ सँदल180 तिस रश्क181 सों अपसाँ घिसाया॥

चमन182 न्यामत183 के ऐसे देख सुथरे। जनावर सीख184 के झाड़्याँ सों उतरे॥

दराजाँ मस्त थे अपनी सदा185 सौं। न थी सुख जों फकड़ लेते उननकूँ॥

बटेराँ, बुल्बुलाँ, सफरा186 था…। थे कलई नर्गिसी उनतें नशेमन187

रिकाब्याँ हौजखाने188 घाव ज्यों नीर। लवे, मुर्राबियाँ189 त्यों उसमें रह तीर॥

कबाबाँ मुर्ग के याकूत190 के रंग। हुआ ताजे खरुस191 उन-रंग पर दंग॥

थे मोतीचूर लडुवाँ कु अँबाराँ। उनन-रश्कों सों लहु घोंटते अनाराँ॥

शकरपारे नजाकत192 सों सँवारे। थे सुंदर193 के अधर-शीरीं194 ते प्यारे॥

जलेब्याँ के निछल शीरेपो रख आँख। झजर से पट्टियाँ के शहद195 रहे झाँक॥

न कूजे कंद196 के थे साफ कंदील। बनाये चाँद के बिल्लोर197 सों झील198

न कै जावे199 कि थे शक्कर-फुटाने। सुरैया200 के थे वो झुमके के दाने॥

देखत फिरनी की प्याली धीर चंदर। गले ज्यों यख201 न सो एक उस-बराबर॥

जो कोई देख्या है वो फालूदा रँगदार। नजर उसकी रंगारंग हुय गुलजार202

कर ऐसी धात203 के न्यामत मुहैया204। बेठाये मेहमाँ-ताईं ले आ आ॥

कँदूरी205 के सफा मैदाँ में जब आय। तुरंगकूँ इश्तहा206 के अस्त्र207 बतलाय॥

मलीदे की कधी टेकाँ पो लाये। कधीं हलवे के दल दल में फँसाये॥

अडाई जीभ-नयन पंखी की दे झाल। पड्या तिस पागमने208 सेवियाँकेरा जाल॥

लगा सिरके की उसकूँ तेज महमेज209। चलाये वाँते कर बेगी जिलव-रेज़210

वो फुलवन का करे सब सैर यकबार। लिए चुम्बन जो कुछ था उनकुँ दरकार॥

मज़ाफ़र211 के लिए थे जो नवाले212। दिसें सदबर्ग213 के फूलाँ में आले॥

मिलाकर दालकू खुश्के214 के संगत। करे खड़ी गुलब्बासी215 अपस हात॥

जो थे खुशरंग216 ज्यों याकूत-दाने217। गुले-औरंग218 कर कुफ़्त्याँ कुँ जाने॥

कमाँचाँ जिसके हाँथाँ बीच आये। गुले-चंदर के नमने219 वो सोहाये॥

कबाबाँ आतिशीं-गुल220 के सों भित्तर। लिए दूर इश्तहा221 का उनसे ती भर॥

गरज जिसकू हुआ जिस द्यात222 रगबत223। मिले वैसे च वाँ उसताइं न्यामत॥

मिठे खाने के जो मैं वस्फ224 बोलूँ। कलमसेती झड़ी शर्बत की खोलूँ॥

जो खारे225 की सिफत226 का मैं करूँ काम। सलोन्याँ227 मुजसेती लेवें नमक-दाम228

कँदूरी खर्च कर जब सब अघाने। लगे हर एक के हाथाँ धुलाने॥

धुलाकर हाथ दी उनताइँ ले मान229। दिये इज्जत सेती हर एक कूँ पान।

युद्ध क्षेत्र

तबल बजते थे हारे नरसिंग पुरगम230। दमामे हर कधन बजते थे धम-धम॥

घतर231 होवे तलक दोधिर232 केरन-सूर। उबलते थे गजब233 सों ज्यों कि समदूर234

अथे यों मुन्तजिर235 जो होय घत्तर। निकालें म्यान सों कीने236 का खंजर॥

खड़ग ले हात-म्याने237 एक बारा। करें जौहर238 अपसका आशिकारा239

बड़े हर हाल वो आखिर हुई रैन। छिप्या कोने में जा आराम होर चैन॥

दिखाया सूर अपस खंजर का झल्काट। सितारयाँ का सकल लश्कर240 गया न्हाट241

हुए दोधिर242 सेती मुस्तैद243 दो दल। दिसै ज्यों भुइंपों प्हाड होर घन244 वो बादल॥

दिलेराँ245 ने सफाँ246 आरास्ता कर। दिये थे मर्दुमी247 की दाद248 यकसार249

पड़े हरतन उपर वाराँ250 सेती गार251। बदल पानी के निकल्या ल्हो का अंगार॥

लगा छातीसों छाती होके गल252 जोड़। सुटे253 सिर हारे सीना हाथ पग तोड़॥

करे गुरजाँ254 के अैसे घात255 सों मार। पड़े थे धरति कू पाताल लग गार256

जिरहपोशाँ257 पड़े हो रन में पामाल। पड़े ज्यों मीन भुइं उपराल बेहाल॥

कर्या यों फोड़ हर यक हाथ का तीर। कि चूम्या हर एक का…रहगीर258

धनुष जब खींचता हर यक कमाँदार259। चला करता “जेहा” “जेह”260 उसकुँ सौ बार॥

दिसे यों जखम्याँ का अक्स261 उसमें रक्तसों। दिखाया ज्यों सफ़क़262 बादलमने263

दिसे यों पाखराँ264 सों हस्ति का दल। कि जैसा नीर भर बादल दिया चल॥

लड़े दिल-सोज265 गिर पड़ होके इस घात। दिवान्याँ कूँ हुआ है जैसा सनिपात266


संदर्भ

1. गरीब से

2. रोवे

3. काँटा

4. कड़मल 

5. नख-तलवार

6. बाहर

7. आँसू 

8. नहाय

9. फूल

10. जगत

11. सूर्य 

12. तुझसे

13. अफसोस

14. फुलवाड़ी

15. काँटा 

16. कुंड 

17. तेरे बिना

18. मिट्टी 

19. प्राप्त 

20. अभीष्ट 

21. प्रात:समीर 

22. भाग्य 

23. नीचा 

24. जबर्दस्ती 

25. कब्र

26. सभा 

27. प्रकाश 

28. आग 

29. कृपा 

30. क्रूर 

31. छोड़ 

32. विश्वासघात 

33. आजिज़

34. लालच 

35. इस समय 

36. पीछे 

37. सुंदरी 

38. पत्र 

39. प्रलय 

40. काली अलकें 

41. धैर्य

42. लाला की भाँति 

43. अत्यंत 

44. आँसूसा 

45. प्रकार 

46. लज्जा 

47. गवाह 

48. छोड़ा 

49. बाधा

50. प्रेम 

51. किसी के प्रेम 

52. प्रतिबिंब 

53. असंभव 

54. कामना 

55. नम्रता 

56. लज्जित

57. प्रार्थना 

58. अभिमान 

59. अलग 

60. एक धूप 

61. बिंदु 

62. धूप का धुआँ 

63. अगर (सुगंध)

64. सरो-सा सीधे शरीर वाला 

65. आँसू 

66. उसमें 

67. चींटी 

68. सिवाय 

69. मिट्टी 

70. समझ

71. दर्याफत 

72. कठोर-दिल 

73. मोम-सी 

74. माया 

75. मिलन 

76. छिड़क 

77. काली

78. पद्मिनी के पास 

79. सम्मान-सहित 

80. यौवन की कृपा 

81. परियों की रानी 

82. ठहरना

83. छोड़ 

84. बाहर

85. खेल

86. छिपा

87. कामना, सुख 

88. फूल तक 

89. काँटा

90. खाना ही

91. कोमलता

92. सूरज समान

93. सीप-सी

94. अप्सरा पुत्र

95. प्रसन्न 

96. डालतीं 

97. डाल

98. सोने का

99. बुनी 

100. बरनी के बुने 

101. कोमल

102. आकाश की लाली

103. फूलदार

104. थाल 

105. लालित्य 

106. फूलदान 

107. मोमबत्ती, दीप 

108. प्रकाश 

109. बलते

110. इंद्र-धनुष में 

111. बीच

112. लाल 

113. स्फटिक 

114. चारों ओर 

115. चाँद 

116. पूर्ण चंद्र

117. शत्रु 

118. लोभ, लालसा 

119. रोम का पसीना 

120. मुख 

121. पसीने की बूँद

122. आकाशी लालिमा 

123. मदिरा 

124. प्रसन्नता 

125. सफलता 

126. अप्सरामुखी

127. मनोहर 

128. ज्वाला 

129. बृहस्पति 

130. अद्भुत 

131. प्रेमी 

132. दुहराना 

133. इच्छुक

134. नृत्य 

135. संबद्ध 

136. पारे 

137. नर्तकी 

138. हृदयोद्यान 

139. ईर्ष्या 

140. पकवान

141. बाहर, फैला 

142. हरसिंगार 

143. प्रथम 

144. स्वीकार 

145. एक भोजन 

146. सुगंधित

147. हरसिंगार 

148. सूखा भात 

149. एक भोजन 

150. रोटियाँ 

151. दुलहन वाली

152. हस्तचुंबन 

153. पन्नीवाला 

154. समोसा 

155. चुंबन 

156. सामने 

157. विवाद

158. पंडित 

159. के लिए 

160. राँगे के 

161. दुर्लभ 

162. जलपक्षी, हंस 

163. दया 

164. चमत्कार

165. सोत्साह 

166. सिर उठाना 

167. रुचि 

168. बेमुरौवत 

169. चिंचेडी 

170. पकवान 

171. हरा

172. आँखों में 

173. चमक 

174. बलंगू 

175. हरा 

176. प्राणप्रिय 

177. कोफता 

178. चमक

179. दस्तरखान 

180. चंदन 

181. तिसकी ईर्ष्या 

182. फुलवाड़ी 

183. शुभोग 

184. कबाब की सीक

185. शब्द 

186. दस्तरख्वान 

187. घोंसला 

188. कुंडगृह 

189. पन चिरई 

190. लाल

191. कुक्कुट-शिखंड 

192. कोमलता में 

193. सुंदरियाँ 

194. ओठ 

195. मधु 

196. मिसरी के कूजे

197. स्फटिक 

198. पिघला 

199. कहा जावे 

200. कृत्तिका (तारे) 

201. बर्फ 

202. फुलवाड़ी

203. भाँति 

204. एकत्रित 

205. दस्तरखान 

206. भूख 

207. प्रभाव 

208. पग में 

209. गंध

210. प्रकाशप्रसार 

211. केसरिया चावल 

212. ग्रास 

213. शतपत्र 

214. फीके चावल

215. एक मिठाई 

216. सुंदररंग 

217. लाल के दाने 

218. एक भोजन 

219. चंद्र पुष्प की भाँति

220. आग्नेय पुष्प 

221. भूख 

222. प्रकार 

223. पसंदी 

224. गुण 

225. नमकीन 

226. गुण

227. सलोनियाँ 

228. नमक का मोल 

229. सम्मान 

230. करुणापूर्ण 

231. प्रात: 

232. दोनों ओर के

233. क्रोध 

234. समुद्र

235. प्रतीक्षा में 

236. डाट 

237. हाथ में 

238. गुण 

239. प्रकट 

240. सेना 

241. भाग 

242. दो तरफ 

243. तैयार 

244. आकाश 

245. वीर 

246. पाँतियाँ

247. बहादुर 

248. प्रमाण 

249. अकेले 

250. प्रहारों 

251. घाव, दरार 

252. गले 

253. फेंके (पंजाबी)

254. गदाएँ 

255. ढंग, प्रकार 

256. दरार, गुहा 

257. कवचधारी 

258. राही 

259. धनुर्धर

260. शाताश 

261. ढाल 

262. छाया 

263. आकाश की लाली 

264. बादल 

265. दिल जलाते

266. सन्निपात


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Artist: Ustad Mansur
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