क्लार्क और फाइल

क्लार्क और फाइल

एक दिन क्लर्क ने फाइल से पूछा–‘यदि मैं तुम्हें छोड़ दूँ तो क्या तुम प्रसन्न रह सकोगे?’

फाइल ने कहा–अगर तुम मुझे छोड़ने से प्रसन्न रह सको तो!

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दूसरे दिन क्लर्क ने फाइल से फिर कहा–मैं तुम्हारा साथ अब नहीं दे सकता! तुम …मेरा कहा… नहीं मानती! फाइल ने व्यंग्यभरी हँसी के बीच कहा–तुम ‘साहब’ की डाँट-फटकार खा जाओगे!

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तीसरे दिन क्लर्क ने गरम साँस ली और फाइल से दिल की बात कही–अब तो हमारा तुम्हारा साथ छूटता है। मैं इस जिंदगी से ऊब गया हूँ।

फाइल भी क्लर्क की निष्ठुरता से उदास हो कर बोली–यदि तुम ही मेरा साथ छोड़ दोगे, तो दुनिया में मेरा अस्तित्व ही नहीं रह जाएगा।

और तब क्लर्क ने फाइल को छाती से चिपकाते हुए कहा–

‘हमारा तुम्हारा साथ मरने के दिन ही छूटेगा!’

उसी दिन से फाइल क्लर्क की आजीवन संगिनी बन गई।


Image: Portrait of a Young Man Writing
Image Source: WikiArt
Artist: Alessandro Allori
Image in Public Domain


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अंजनी कुमार सिन्हा ‘आजाद’ द्वारा भी