खुशियों का व्यापार

खुशियों का व्यापार

गाँव छोटा था, वहाँ गिनती के घर थे। उस दिन गाँव भर में खुशियाँ मनाई। लड़की का जन्म ही उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं था और इस उपहार को उन्होंने बड़े सलीके से रखा-पाला था।

…ज्यों-ज्यों वह लड़की बड़ी होने लगी, त्यों-त्यों परिवार में एक बेफिक्री का आलम नजर आ रहा था। फिर भी, ऐसा क्या था जिस पर लड़की के बड़ी होने पर गाँववाले खुशियों से भरे-भरे थे।

हूँ..! लड़की तो लड़की थी, चाहे वह छोटी हो या बड़ी।… भविष्य में देह-व्यापार के बाजार में उसकी कीमत वसूली हो जाएगी।


Image :Laughing Gypsy Girl
Image Source : WikiArt
Artist : Robert Henri
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सत्य शुचि द्वारा भी