बाजार में आदिवासी

A Street Market Scene, India by Edwin Lord Week

बाजार में आदिवासी

भरे बाजार में
वह तीर की तरह आया
और सारी चीजों पर
एक तेज हिकारत की नजर फेंकता हुआ
बिक्री और खरीद के बीच के
पतले सूराख से
गेहुँवन की तरह अदृश्य हो गया
एक सच्चा
खारा
ठनकता हुआ जिस्म
कहते हैं वह ठनक अबूझमाड़ में
रात-बिरात
अक्सर सुनाई पड़ती है
मिला कोई गायक
तो एक दिन पूछूँगा
संगीत की भाषा में
क्या कहते हैं इस ठनक को?


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Artist: Edwin Lord Weeks
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