आज तनहाई में यादों के तले

आज तनहाई में यादों के तले

आज तनहाई में यादों के तले
मैंने हासिल किये हैं ग़म के क़िले
देख आहों की पुरअसर ताकत
हर्ष भी दर्द के लिए मचले
मैं बयाबाँ का बन गया मालिक
अब चमन मुझको मिले या न मिले
यह अंधेरा भी कम हसीन नहीं
क्या जरूरत की चाँद फिर निकले
दूर रहकर भी मेरे ख्वाबों में
रोज आता है कोई रात ढले


Image: Taj Mahal Twilight
Image Source: Wikimedia Commons
Artist: Charles William Bartlett
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