बदरा की, ए सखि हमरा बतावइ

बदरा की, ए सखि हमरा बतावइ

मैथिली

हमरो त श्याम एहन सुंदर छथि जिनका लखि सत काम लजावइ।
उमड़ि घुमड़ि घन बरसइ गरजइ, विधुत सँ किए हमरा डरावइ।
हेरल गगन नयन सँ सजनी कार कार मद सँ इतरावइ।
एकर गुमान त पवन बुझइ छइ जकरा लखि ई कोस पराबइ।
अरुण प्रभा मुख हास लसै छंहि ‘विंध्य’ ठुमकि सखि मुरली बजावइ।