चाँद

चाँद

गगन में भूला-भूला चाँद
दूर मुझसे कितना आकाश
किरण है मेरे कितने पास
चाँद से चलकर आई दूर
छाँह बनकर है मेरे साथ
गगन में सूना-सूना चाँद

दूर मन, और दूर तक रात
किंतु यह बात न अब तक ज्ञात
कमलनी ने गाए क्यों गीत
कमल ने मूँद लिए क्यों पात
गगन में खोया-खोया चाँद

सदा जब मैं गाता हूँ गीत
नयन में क्यों बसता है मीत
बराबर अश्रु और अंगार
किंतु शीतल क्यों यह संगीत
गगन में भीगा-भीगा चाँद

रात का है सूना शृंगार
चाँद का यदि कम पाया प्यार
धरा की भी है सूनी गोद
चाँद का है यदि कम विस्तार
गगन में फूला-फूला चाँद
गगन में भूला-भूला चाँद


Image: Sea view by Moonlight
Image Source: WikiArt
Artist: Ivan Aivazovsky
Image in Public Domain


Notice: Undefined variable: value in /var/www/html/nayidhara.in/wp-content/themes/oceanwp-child/functions.php on line 154
सुरेंद्र तिवारी द्वारा भी