छटपटाहट

छटपटाहट

कविता की रचना सिर्फ रचना
नहीं है मेरे लिए
मन की छटपटाहट जब
खौलते पानी की तरह ही
रह रह कर पट पट की आवाज से
मेरे मन प्राण को जलाती है
अंदर के उद्गार मुझे बेबस करती है
तब प्रसव पीड़ा सी अनुभूति ही
एक नई कविता को जन्म देती है।


Original Image: Thinking
Image Source: WikiArt
Artist: Nicolae Vermont
Image in Public Domain
This is a Modified version of the Original Artwork


Notice: Undefined variable: value in /var/www/html/nayidhara.in/wp-content/themes/oceanwp-child/functions.php on line 154
श्वेता शेखर द्वारा भी