बाज के पीठ पर बैठ परिंदा

बाज के पीठ पर बैठ परिंदा

बाज के पीठ पर बैठ परिंदा
कब तक रह पाएगा जिंदा

शेर-मेमने एक घाट पर
हैरत में है हर बाशिंदा

वक्त की नब्ज टटोल रहा है
बगुला भगत शरीफ दरिंदा

झूठ की महिमा यूँ गाता है
सच भी हो जाए शर्मिंदा

परजीवी जोकों के माफिक
खून-चूस है अब तक जिंदा

स्वांगी दुनिया का सुख भोगें
मासूमों पे जात का फंदा

बहकावे में फँसा ‘विप्लवी’
सूत्रधार है वही दरिंदा।


Image : The Laundress
Image Source : WikiArt
Artist : Stefan Luchian
Image in Public Domain

बी.आर. विप्लवी द्वारा भी