बेटी पर सख्ती, बेटे को मस्ती के अधिकार मिले

बेटी पर सख्ती, बेटे को मस्ती के अधिकार मिले

बेटी पर सख्ती, बेटे को मस्ती के अधिकार मिले
नगर नगर कस्बों गाँवों को सीख में ये उपहार मिले

बालिग नाबालिग सब वहशी, तल्बा जुल्म के मकतब के
औरत की अस्मत के लुटेरे बन के सरे-बाजार मिले

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी बसाओ के नारे
झूठ फरेब के गाँवों में फुसलाने के किरदार मिले

फुर्सत के लम्हात मिले तो रूठ गया जादू तन का
इक बिस्तर पर दो जिस्मों के बीच में खर-पतवार मिले

पटरानी बन दुख पीड़ाएँ महल में काबिज हो बैठीं
सुख आराम के दाई नौकर बाहर के हकदार मिले

देख नहीं सकते जिसको कोहराम मचाया है उसने
उसके आगे फेल मिसाइल, एटम बम, हथियार मिले

मजदूरों की रोटी-रोजी छिन गई, भात मुहाल हुआ
पैदल, ट्रक या रेल के पहियों पर बेबस घरबार मिले

मौत का मीटर, खौफ की दहशत काबू में आए न ‘कँवल’
डॉक्टर हों या नर्स पुलिस, गुमसुम जग के व्यापार मिले।


Image : September Afternoon
Image Source : WikiArt
Artist : Edward E. Simmons
Image in Public Domain


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