घबराइए न, आइए यह आपका घर है

घबराइए न, आइए यह आपका घर है

घबराइए न, आइए यह आपका घर है
मेरे समीप आने में किस बात का डर है

मिल करके जिससे पाल लिया भय है आपने
उसका मनुष्य लेखनी भर में है, ख़बर है

जाता नहीं है गाँव जो मुझमें बसा हुआ
लेकिन जहाँ हूँ आज बसा वह तो शहर है

आ आके गाँव से हैं कई लोग पूछते
जाता है जो संसद को रास्ता वो किधर है

लालच में जिसके आप हैं पीयूष समझकर
शोहरत वो हक़ीक़त में तो मीठा सा ज़हर है

होने को हो गई, न जगी चेतना लेकिन
कैसा है ज़माना ये हाय कैसी सहर है।


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Artist : George Luks
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रामदरश मिश्र द्वारा भी