मोह से दंशित समर्पण के प्रबल

मोह से दंशित समर्पण के प्रबल

मोह से दंशित समर्पण के प्रबल प्रतिवाद से
पाप अपना धो रही सत्ता महज उन्माद से

तोड़कर सारी हदें जो प्रश्न संसद में उठे
देखकर पथरा गईं आँखें मुखर संवाद से

मूल्य बदले जा रहे हैं आपसी संबंध के
प्यार के बल से प्रलोभन जातिगत अनुवाद से

यातनाएँ दो न उसको गर्भ में ही इस तरह
एक बच्चा दुधमुँहाँ भर जाएगा अवसाद से

स्वर्ण पाना है अगर जो खुद मरो तो पाआगे
क्या कभी सपना हुआ सच होंठ की फरियाद से।


Image : Street Scene near the El Ghouri Mosque in Cairo (detail)
Image Source : WikiArt
Artist : John Frederick Lewis
Image in Public Domain