जिंदगी का इस तरह हम पर सितम टूटा कि बस

जिंदगी का इस तरह हम पर सितम टूटा कि बस

जिंदगी का इस तरह हम पर सितम टूटा कि बस
बुतकदों से आखिरश ऐसा भरम टूटा कि बस

क्या बताएँ किस कदर हम पर ये गम टूटा कि बस
एक पल में ख्वाहिशों का ऐसा दम टूटा कि बस

खुद से खुद का सामना करना भी मुश्किल हो गया
आईने को देख कर ऐसा भरम टूटा कि बस

जो सभा में थे, सभी चेहरों की रंगत उड़ गई
राम के छूते, धनुष यूँ एक दम टूटा कि बस

एक तिनके की तरह सब कुछ बहा कर ले गया
बादलों से अब के ऐसा आबे-जम टूटा कि बस।


Image : Seascape
Image Source : WikiArt
Artist : James Hamilton
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अजय अज्ञात द्वारा भी