जिंदगी के हर सफर का है

जिंदगी के हर सफर का है

जिंदगी के हर सफर का है अलहदा रास्ता
मेरा अपना रास्ता है, तेरा अपना रास्ता

मेरी यह मुश्किल भला कैसे समझता रास्ता
खोज पाता मैं नहीं अब अपने घर का रास्ता

रास्ता यह जिंदगी का चलता रहता है सदैव
हम मुसाफिर ही बदलते कब बदलता रास्ता

रोक पाया कौन नदिया से समुंदर का मिलन
खोज ही लेती है नदिया इस मिलन का रास्ता

पूरे रस्ते चुप रहा वो अब वो परिचय चाहता
आ चुका जब खत्म होने को हमारा रास्ता

वो भी क्या दिन थे हमारे सात रंगी ख्वाब थे
हर तरफ दिखता था हमको तेरा-मेरा रास्ता

हौसले की रौशनी ले कर चलो आगे ‘समीप’
पार तो करना ही होगा यह अँधेरा रास्ता।


Image : Street in Yalta
Image Source : WikiArt
Artist : Isaac Levitan
Image in Public Domain

हरेराम ‘समीप’ द्वारा भी