खुशरंग नजारों से गुजरने नहीं देता

खुशरंग नजारों से गुजरने नहीं देता

खुशरंग नजारों से गुजरने नहीं देता
वो मौसमे-वादी को सँवरने नहीं देता

है वक्त के सैलाब में बहना ही मुकद्दर
गिर्दाब तो कश्ती को उभरने नहीं देता

कुछ जख्म भर जाते हैं कुछ रोज में लेकिन
कुछ जख्मों को मैं ही कभी भरने नहीं देता

वो कत्ल का मंजर वो मेरा सच से मुकरना
जीने नहीं देता मुझे मरने नहीं देता

जज्बे का सफर अक्ल से आगे का सफर है
ये नश्शा किरन सर से उतरने नहीं देता।


Image : Near Newport, Rhode Island
Image Source : WikiArt
Artist : John Frederick Kensett
Image in Public Domain

प्रेम किरण द्वारा भी