कुछ अनोखे गीत गाना चाहता हूँ

कुछ अनोखे गीत गाना चाहता हूँ

कुछ अनोखे गीत गाना चाहता हूँ
मैं तुझे फिर से रिझाना चाहता हूँ

अश्रु का मुस्कान में अनुवाद करना
जान ले सारा जमाना, चाहता हूँ

शत्रु सारे मित्रता के मंत्र बाँचें,
एक लौ ऐसी जलाना चाहता हूँ

धीवरों के जाल को कैसे कुतरना,
मछलियों को मैं पढ़ाना चाहता हूँ

साँड़ तेरे ही तुझे चर जाएँगे,
मैं सियासत को बताना चाहता हूँ

बजबजाने लगी है सारी व्यवस्था,
मैं व्यवस्था नई लाना चाहता हूँ

आदमी ही आदमी को अब ‘विजय’
छोड़ दे कच्चा चबाना, चाहता हूँ

इसलिए कि मुक्ति तेरी कोख जन्मे,
रक्त में तेरे समाना चाहता हूँ

क्योंकि पीड़ा भी परायी हो गई है,
इसलिए मैं मुस्कुराना चाहता हूँ।


Image : Portrait of Albert de Belleroche
Image Source : WikiArt
Artist :John Singer Sargent
Image in Public Domain


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विजय प्रकाश द्वारा भी