मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ

मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ

मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ
वो गजल आप को सुनाता हूँ

एक जंगल है तेरी आँखों में
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ

तू किसी रेल-सी गुजरती है
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूँ

हर तरफ एतराज होता है
मैं अगर रौशनी में आता हूँ

एक बाजू उखड़ गया जब से
और ज्यादा वजन उठाता हूँ

मैं तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने करीब पाता हूँ

कौन ये फासला निभाएगा
मैं फरिश्ता हूँ सच बताता हूँ।


Image : The Railway Bridge at Argenteuil
Image Source : WikiArt
Artist : Claude Monet
Image in Public Domain


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दुष्यंत कुमार द्वारा भी