पास तुम्हें पाता हूँ

पास तुम्हें पाता हूँ

जब भी बहुत अकेला होता, पास तुम्हें पाता हूँ
परेशानियों में रह कर भी हरदम मुस्काता हूँ

बिन खिड़की, बिन दरवाजे का घर इक, घना अँधेरा,
उसके अंदर बंद हुआ मैं–अक्सर सपनाता हूँ

यक्ष रामगिरी पर मैं शापित, बेवश क्या कर सकता?
बहुरें दिन, इस इंतजार में मेघदूत गाता हूँ


Image :A Bedouin Arab
Image Source : WikiArt
Artist :John Singer Sargent
Image in Public Domain


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विजय प्रकाश द्वारा भी