शून्य की कल्पना दे गया

शून्य की कल्पना दे गया

शून्य की कल्पना दे गया
वक्त सपनों को क्या दे गया

हम उसी पर चले उम्रभर
मौन जो रास्ता दे गया

धूप का एक टुकड़ा महज
मंजिलों का पता दे गया

जल उठे फूस के सारे घर
आग को फिर हवा दे गया

दोस्त दुश्मन नहीं था मगर
जख्म कैसे नया दे गया।


Image : Bishop Benjamin Tucker Tanner
Image Source : WikiArt
Artist : Henry Ossawa Tanner
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