ये धरती आज भी चुप है

ये धरती आज भी चुप है

ये धरती आज भी चुप है, ये अंबर आज भी चुप है
हमें जिस पर भरोसा है, वो पत्थर आज भी चुप है

उसी दिन से दरिंदों की शिकायत दर्ज है लेकिन
वो थाना आज भी चुप है वो अफसर आज भी चुप है

लकीरों का निशाँ कोई, न कोई खून का धब्बा
जो कातिल का पता देता, वो खंजर आज भी चुप है

गजब का शोर था बाजार में तो आज भी लेकिन
जहाँ गूँजीं कई चीखें, वो तलघर आज भी चुप है

मगरमच्छों ने जाने कितनी सारी मछलियाँ खा लीं
समंदर पहले भी चुप था, समंदर आज भी चुप है

जो सुन सकता है वो चुप है, जिसे दिखता है वो है चुप
अरे जो बोल सकता है, वो बंदर आज भी चुप है।

कहीं भी जुल्म होता है तो उस पर शेर कहता है,
मगर खुद अपने बारे में सुखनवर आज भी चुप है।


Image : Silence
Image Source : WikiArt
Artist : Fernand Khnopff
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अशोक मिजाज द्वारा भी