कभी आके इधर हरियालियों पे बात

कभी आके इधर हरियालियों पे बात

कभी आके इधर हरियालियों पे बात करते हैं
उधर जाके समुंदर में कहीं बरसात करते हैं

हमें दिन-रात क्या मालूम, उनको ही पता ये सब
जगाकर दिन वे करते हैं सुलाकर रात करते हैं

लगाकर आग दरिया में, सुरक्षित बच निकलते खुद
किनारे बैठकर कहते कि तहकीकात करते हैं

इधर से जो गिराते हैं इधर से ही तो लेते हैं
मगर बादल का दावा है कि वे बरसात करते हैं

कभी बातों से अमृत को बचाना है नहीं मुमकिन
जहर पीते नहीं हैं, सिर्फ शिव-सुकरात करते हैं

अभी क्यूँ आसमाँवाले जमीं को चूमने आए
कभी तो हरकतें ऐसी नहीं हजरात करते हैं।


Image : Mississippi Boatman
Image Source : WikiArt
Artist : George Caleb Bingham
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दिलीप दर्श द्वारा भी