हमेशा ख्वाब की दुनिया

हमेशा ख्वाब की दुनिया

हमेशा ख्वाब की दुनिया नई बसाती है
हक़ीक़तों से सदी आँख कब मिलाती है

उसे ये कौन बताए कि खींचा-तानी में
किसी भी रिश्ते की हो डोर टूट जाती है

सभी के हाथ में ख़ंजर दिखाई देते हैं
मगर ये भीड़ कहाँ सच को देख पाती है

जो देखना हो तो देखो बरसते पानी में
तभी सड़क की हक़ीक़त समझ में आती है

तमाम ख्वाब सुनहरे मैं छोड़ आया हूँ
वो मेरे गाँव की मिट्टी मुझे बुलाती है।


Image : Cossack
Image Source : WikiArt
Artist : Vasily Surikov
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अनिरुद्ध सिन्हा द्वारा भी