दीवाली आई

दीवाली आई

लाभ-शुभ ने
धर दिए हैं
द्वार पर दोनों चरण
विश्व की सारी
खुशी आकर करे
अपना वरण।
प्रश्न मुश्किल
जिंदगी
का हल हुआ।
स्वर्णिम किरण
धरा पर उतरी
जी भर मुस्काई।
दीवाली
आई।

जले नेह के दीप दिलों में
नव उत्सव जागा।
अपनी कारा तोड़ स्वयं ही
अँधियारा भागा।
रंगत घुली नई
मौसम ने ले ली
अँगड़ाई।
दीवाली
आई।

रौशन हुआ धरा का आँगन
मांडे रंगोली।
सौगातों को दे आमंत्रण
फैला कर झोली।
नेह पगे अंतर
अब उच्चारें
आखर ढाई।
दीवाली
आई।

फुलझड़ियों से नित्य नेह के
सुंदर फूल झरें।
वंचित, शोषक की कुटिया में
चलकर दीप धरें।
भेदभाव की
चलो पाट दें
युग-युग की खाई।
दीवाली
आई।


Image: Anonymous – Ladies Celebrating Diwali Cleveland Museum of Art
Image Source: Wikimedia Commons
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मनोज जैन द्वारा भी