मुझे छिपाओ मत

मुझे छिपाओ मत

मुझे छिपाओ मत
जैसे नर्मदा छिपाती
शालिग्राम शिला अंतस में।

चारों चरण सृजन के हैं
आत्मनेपदी ही
परस्मैपदी तो प्राण-प्रतिष्ठा से होते हैं।
जड़-जंगम के बारे में
अनजान फतिंगे
गूलर फल में जन्मे,
जगकर भी सोते हैं।

मुझे तराशो मत
जैसे जलधार तराशे
कानन को रखकर वेतस में।

जाने कितने रूप नष्ट
होते हैं प्रतिदिन
पता देह को नहीं
सिर्फ आत्मा को होता।
भक्ति अगर है तो
अवश्य ईश्वर भी होगा
प्यास लगे तो जैसे हो
पानी का सोता।

मुझे निखारो मत
जैसे संध्या निखारती
नक्षत्रावलि को मावस में।


Image : The Woman in a Podoscaphe
Image Source : WikiArt
Artist : Gustave Courbet
Image in Public Domain


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बुद्धिनाथ मिश्र द्वारा भी