फतह किया राजा ने

फतह किया राजा ने

फतह, किया
राजा ने
एक किला और।

संदेशा भेज कहा
स्वीकारो दासता।
वर्ना हम दिखलाएँ
बाहर का रास्ता।

अब भी है समय
हमें मानो
सिरमौर।

रणभेरी बजी खूब
देखकर सुभीता।
कुटिल चाल चली
युद्ध राजा ने जीता।

परजा ने
फिर ढूँढ़ा
एक नया ठौर।

क्षत्रप सब राजा के
संग साथ नाचें।
परजा के हाव-भाव
एक-एक जाँचें।
आया जी
चमचों का
कैसा यह दौर।

हँसी-खुशी आका को
बोलो कब भाती।
राज़ करो फूट डाल
नीति ही सुहाती।

बात रही
इतनी सी
फरमाना गौर।

कौन यहाँ सच कहने
सुनने का आदी।
पीटे जा राज़ पुरुष
जोर से मुनादी।

पसरेंगे
पैर नहीं
छोटी है सौर!

युग बीता अच्छा दिन
एक नहीं आया।
ज्ञानी ने मूरख को
स्वप्न फिर दिखाया।

भूखों को
घी चुपड़े
डाल रहा कौर।


Image : ने Great Mogul And His Court Returning From The Great Mosque At Delhi, India
Image Source : WikiArt
Artist : Edwin Lord Weeks
Image in Public Domain


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मनोज जैन द्वारा भी