देवता का दैत्य?

देवता का दैत्य?

कभी मैं देवता था
लोग मुझसे प्रेम करते थे
मुझसे अपेक्षा करते थे
वे मुझे गिरा देते और मैं कपड़े झाड़
उनके देव हो जाने की कामना करता
मैं सच बड़ी संजीदगी से छुपाता
मगर झूठ से दूर रहता
मैं अपने बनाए कुछ बंधनों में था
जिनका होना ज़रूरी था

मेरे लिए ‘उम्मीद’ महज़ शब्द नहीं
संभावना थी
चीज़ों का अचानक ही हो जाना मेरे लिए
बड़ी बात थी
जीवन को मैं बहुत सहज मानता था
और खुद को सबके बाद खड़ा करता था।

अब मैं दैत्य हूँ
कुछ लोग अब भी मुझसे
प्रेम का दिखावा करते हैं
हालाँकि लोगों ने अपेक्षाएँ करनी छोड़ दी
अब मैं लोगों से बच कर रहता हूँ और उनके देव या दैत्य हो जाने से फ़र्क नहीं पड़ता
मैं सच बेफिक्र होकर बोल पाता हूँ
और झूठ भी
मैं आज़ाद हूँ, जिसका होना खतरनाक है
‘उम्मीद’ महज़ शब्द से अधिक कुछ नहीं है
चीज़ों के हो जाने से फ़र्क पड़ना ही
बंद हो गया
अब मेरे लिए जिया जाना भी बोझ है
और मेरे लिए बस मैं ज़रूरी हूँ।
मैं पहले देव था, अब दैत्य हूँ
या, मैं पहले दैत्य था, अब देव हूँ
ये तय कौन करेगा!


Image : Shepherd Tending His Flock
Image Source : WikiArt
Artist : Jean-Francois Millet
Image in Public Domain

अभिलाष प्रणव द्वारा भी