ईश्वर बनाम मनुष्यता

ईश्वर बनाम मनुष्यता

अपने गिरोह के मुट्ठी भर खल साहित्यिकों के साथ
मिल बैठ कर खड़ा किया उन्होंने
किसी कद्दावर कवि के नाम पर एक ‘सम्मान’
और वे सम्मान-पुरस्कर्ता बन कर तन गए
इस तिकड़म में महज कुछ सौ रुपयों में
अपने लिए पूर्व में खरीदे गए
दिवंगत साहित्यकारों के नाम के
कुछ क्षुद्र सम्मानों का नजीर उनके काम आया

अपने नवसृजित सम्मान के कुछ शुरुआती अंकों को
उन्होंने उन पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों पर वारा
जो उनकी घासलेटी रचनाओं को
घास तक नहीं डालते थे
फिर तो उनकी और उनकी थैली के चट्टों-बट्टों की
कूड़ा रचनाएँ भी हाथोंहाथ ली जाने लगीं यकायक

अपनी जुगाड़ी कल के बल सरकारी नौकरी हथियाए
इस गिरोह के सिरमौर कवि ने लगे हाथ एक सम्मान
अपने कार्यालय बॉस पर भी चस्पाँ करवा डाला
ताकि फूल-फूल कर बॉस और अधिक फलदायी बन सके
अब यकीनन इस फिराक में था यह दूरंदेशी कवि
कि अपने कुल-खानदान के चंद और नक्कारों को भी
बरास्ते बॉस-कृपा वहीं कहीं अटका-लटका सके वह
महज अपने कवि-कल व छल-बल के बलबूते ही
कविता के प्रदेश में गुंडई कर्म की
बखूबी शिनाख्त करने में लगा यह कवि
और उसके कुनबे के इतर जन भी
दरअसल स्वयं क्या साहित्य में
एक और गुंडा-प्रदेश नहीं रच रहे थे!


Image: Hindu temple and Banyan tree
Image Source: Wikimedia Commons
Artist: Thomas Daniell
Image in Public Domain


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मुसाफिर बैठा द्वारा भी