गृह प्रवेश

गृह प्रवेश

धमनियों को लपेटूँगी अँगूठों पर
और दिल को पैरों में पहन लूँगी
एड़ी में सुनाई देगी धड़कन
घुटने से नव्ज़ मिलेगी
जब दरवाज़े से दाख़िल होऊँगी
रास्ते पर छोड़ दूँगी लहू के निशान
दुनिया मेरा मंगल भवन होगी
मैं हर कदम पर सुहाग मनाऊँगी।


Image : A Day Dream
Image Source : WikiArt
Artist : Eastman Johnson
Image in Public Domain


Notice: Undefined variable: value in /var/www/html/nayidhara.in/wp-content/themes/oceanwp-child/functions.php on line 154
श्रद्धा उपाध्याय द्वारा भी