कसौटी

Poet by Henri Martin

कसौटी

जब तक आप
कविता लिखते रहते हैं
न जाने आपने
ध्यान दिया है कि नहीं–
फन फैलाए साँप
घूमता ही रहता है आसपास
फुफकारते हुए
सृजन के क्षणों को डंसने की
जन्म लेते ही अक्षर को मारने की
भरसक कोशिश करते हुए
कागज़ों को एक तरफ
रखकर सो गए तो
सपनों की बाँबी में घुसकर
कल्पना में ही सृजन के क्षण को
खतम करने का
प्रयत्न करता है वह
क्या कविता सवाल करती है?
इंसानों को जोड़ती है?
रचना क्या सचमुच
बदल सकती है समय को?
डराने के लिए या प्रतिकार के लिए
क्या पास ही बैठा है साँप?
कैद की सलाखों के पीछे सृजन का क्षण
आपातकाल में मुँह खोलने वाली जेलों में
आवाज़ उठाने वाला सृजन का क्षण
लाठियों और गोलियों का
सीना तानकर सामना करने वाला
सृजन का क्षण
जब टूटने लगता है इंसान
रंग बदलने लगता है मज़हब
सलीब पर जब आँसू बहाने
लगता है समय, तब
शब्द को कसौटी में
बदलता है सृजन का क्षण।
इसीलिए यह फुफकार–
उससे डरनेवाले सृजन के क्षण
सुरक्षित हैं समय की नली में।
वाक्य के बाद दूसरा वाक्य बनकर
इंसान की बगल में इंसान की तरह
हौसला बढ़ाने वाले सृजन क्षण ही हैं
सच्चा इतिहास…सच्ची कविता!
कवि है…समय को
लिखने वाला इतिहासकार!


Image: Poet
Image Source: WikiArt
Artist: Henri Martin
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