एक पेड़ की तरह

एक पेड़ की तरह

मेरी कितनी जरूरत थी तुम्हें
या फिर तुम्हारी मुझे
इन सब बातों को लेकर अब कोई
हिसाब-किताब नहीं करना चाहता मैं

वैसे भी क्या रखा है अब इन
घीसी-पीटी पुरानी बातों की बतकही में

हाँ इतना भर जरूर कह सकता हूँ
एक लंबे अंतराल के बाद
तुमसे अलग रहते हुए
घर से काम पर जाने
और काम से घर लौटने के रास्ते में
एक पेड़ की तरह थी तुम मेरे लिए

एक पेड़ की तरह
जहाँ कभी कभार थोड़ा रुक कर
सुसता लिया करता था मैं
जिंदगी की भाग-दौड़ से थक-हार कर!


Image : Oriental woman
Image Source : WikiArt
Artist :Jean François Portaels
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अशोक सिंह द्वारा भी