मेरी मजबूर सी यादों को

मेरी मजबूर सी यादों को

ये जो तुम मुझको मुहब्बत में सजा देते हो
मेरी खामोश वफाओं का सिला देते हो

मेरे जीने की जो तुम मुझको दुआ देते हो
फासले लहरों के साहिल से बढ़ा देते हो

अपनी मगरूर निगाहों की झपक कर पलकें
मेरी नाचीज सी हस्ती को मिटा देते हो

हाथ में हाथ लिए चलते हो जब गैर का तुम
मेरी राहों में कई काँटे बिछा देते हो

तुम जो इतराते हो माजी को भुलाकर अपने
मेरी मजबूर सी यादों को चिता देते हो

जबकि आने ही नहीं देते मुझे ख्वाबों में
मुश्किलें और भी तुम मेरी बढ़ा देते हो

राह में देख के भी, देखते तुम मुझको नहीं
दिल में कुछ जलते हुए जख्म लगा देते हो।


Image : At the Window
Image Source : WikiArt
Artist : Winslow Homer
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