प्रार्थना की पनाह में

प्रार्थना की पनाह में

निष्कर्ष की तरह कहा गया
कि डर ने रचा ईश्वर को
जोड़ा यह भी जाए
कि डर ने रचा धर्म को
डर ने ही रचा युद्ध को भी

सदियों से रहा धर्म पर खतरा
धर्म की रक्षा के लिए
लड़े जाते रहे युद्ध सदियों से
धर्म को बचाने में हालाँकि रहे वे विफल
महान धर्म योद्धाओं ने
युद्धों की विजय पताकाओं ने नहीं लेकिन
बुदबुदाती उठती प्रार्थना ने बचाए धर्म

भरमाया बरगलाया खूब धर्मों ने
धर्म रीतियों ने बनाई दरारें खोदी खाइयाँ
खतरनाक हथियारों और
मानव बमों में बदला
जीते जागते इनसानों को
हुए खून के प्यासे
प्रार्थना धुर विरोधी धर्मों में भी मगर
कोमल एक सूत्र की तरह रही मौजूद

भीषण धर्मयुद्धों के बाद भी
फिर फिर लौटते रहे धर्म
आर्द्र सुबह के मौन में
प्रार्थना के ही पास

प्रार्थना की भीगी
कातर पुकार ने छुआ
हर किसी का अंतरतर
भिगोया लहराया भीतर का जल
प्रार्थना की उजास में
फिर फिर जुटते रहे
अनंत लोगों के काफिले

देखो, प्रार्थना की पनाह में हैं
दुनिया के सभी धर्म
वहीं बचे हैं।


Image : Study of an Old Man
Image Source : WikiArt
Artist : Jan Lievens
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