खुद से मोह

खुद से मोह

अरे!
कब तक अलापते रहोगे एक ही राग
कब तक इस दंभ में रहोगे
तुम्हारे कदमों से आगे
कोई कदम बढ़ नहीं सकता
तुम्हारी पोटली से भारी
दूसरों की नहीं हो सकती
और तुमसे ज्यादा मॉडर्न तो कोई हो नहीं सकता
अरे!
सूर्य की पहली किरण के साथ जगना सीखो
दोनों आँखें खोलकर देखना सीखो
तब देखो क्या होती है असली ख़ुशी
क्या होती है सुख-समृद्धि
तब तुम्हारे मन-मस्तिष्क के अँधेरों का पता चलेगा
और तब तुम्हें दिखेगा
दंभ से बनी दीवारों का दरकना
और समझ सकोगे
उल्टी दिशा में अपने बढ़ते कदम को।


Image : Eugene Manet
Image Source : WikiArt
Artist : Edgar Degas
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सारिका भूषण द्वारा भी