चाबी है सब्ज़ियाँ

चाबी है सब्ज़ियाँ

पत्नी जब बाज़ार जाती है
सब्ज़ियाँ ख़रीदते समय मोल-भाव करती है
पर कहीं खो जाती है
विभिन्न सब्ज़ियों को चुनते समय
जैसे वह किसी को सहला रही हो
ठोंक रही हो किसी की पीठ
किसी के ख़राब हो रहे होने की पीड़ा भी
दिखती है उसके चेहरे पर

कई बार तो सब्ज़ी वाला टोकता है–

‘मैडम ज़रा जल्दी कीजिए

और भी कस्टमर हैं!’

सब्ज़ियाँ काटते समय भी
वह खोई रहती है किसी और दुनिया में
खाने बैठो साथ तो खुल जाती है
उसकी स्मृतियों की पिटारी
उसका गाँव, खेत-खलिहान

सब कुछ सब्ज़ियों की उँगली पकड़े आ जाते हैं
स्मृतियों से बाहर निकल कर

उसके पास है
स्मृतियों की थान का ख़ज़ाना
शहर में जिसकी चाबी हैं–सब्ज़ियाँ।


Image : Vegetables
Image Source : WikiArt
Artist : Ilya Mashkov
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