बेवजह

बेवजह

कभी-कभी बेवजह ही
उग जाती है घास
पत्थर के सख्त शरीर पर

बेवजह ही खिल कर
गिर जाते हैं हरसिंगार
बेवजह ही शोर मचाता है समंदर
बेवजह ही बरस जाते हैं
बादल कभी-कभी

दुनिया में कुछ चीजों का बेवजह ही होना
कितना सुकूनदेह होता है!

तुम भी लौट आओ न, प्रिये
इसी तरह बेवजह ही एक दिन
इससे पहले कि दुनिया
हर बेवजह चीज की वजह ढूँढ़ने लगे!


Image : Les Crocus
Image Source : WikiArt
Artist : Lucien Pissarro
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