नीलकंठ

नीलकंठ Troubled by Wassily Kandinsky- WikiArt

नीलकंठ

जब हम
अपनी हवस में
ऊँचा और ऊँचा उठने के लिए
हवा में घोल रहे होते हैं– जहर
तब वह
दिन में नीलकंठ की तरह
उसका विष चूस रहा होता है
ताकि हम बचे रह सकें–
जहरीली हवाओं से

इतना ही नहीं, वह
सूरज के सहयोग से
पृथ्वी के सभी प्राणियों के लिए

उत्साह से बना रहा होता है–
भोजन
रात को वह
थक कर चूर सो जाता है–
मजूर किसान
किरानी, चपरासी, अध्यापक और
दुनिया में हर नेक काम करने वाले
भले मानुषों के साथ
गहरी नींद में
…तब सिर्फ
लुटेरे और षड्यंत्रकारी
पृथ्वी के विरुद्ध
साजिश कर रहे होते हैं–
पेड़ काटने की।


Image: Troubled
Image Source: WikiArt
Artist: Wassily Kandinsky
Image in Public Domain


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