नींद में हैं शब्द

नींद में हैं शब्द

कोई शब्दों से संवाद करना चाहता है
वे मौन हैं
मौन के अंदर व्यथा, आक्रोश,
मुस्कान तलाशता है
वहाँ कुछ नहीं है
शब्द दरवाजे उढ़का कर सो गए हैं

ज़रूरत के सबसे नाज़ुक पलों में
शब्द सो जाते हैं

कोई कविता
बिखरी-बिखरी रह जाती है
बिखरा होना, वैसे उसका
नहीं होना नहीं होता
शब्दों के जागने तक
जागती रहती है कविता
प्रतीक्षा बहुत लंबी हो सकती है
इस अंतराल में
अकूत जल नदियों में बह कर
कहीं भी जा सकता है,
जन्म के उस दौर में
हथेलियों के बीच
वायवी तत्त्व होती है कविता
मुट्ठी में पकड़ी नहीं जा सकती।

शब्दों का असहयोग आंदोलन
आंदोलनों के अंत का आरंभ होता है
बदलाव का अकाल गर्भपात
और चिंगारियों पर बरसता बादल

शब्द कभी-कभी
भूल जाते हैं जागना ज़रूरी है
उनका अंगड़ाई लेना
धरती का सुलगना है
जहाँ ओझले लपटों का
ताप महसूस होता है
पारा बहुत धीमी गति से
मगर निरंतर बेरोमीटर में ऊपर चढ़ता है

कोई ताप को समूचे भूमंडल पर
फैलता हुआ महसूसना चाहता है
और…इस वक्त शब्दों की
उदासीनता से खिन्न है।


Image :The poor little thing
Image Source : WikiArt
Artist :Pellizza da Volpedo
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राजेन्द्र नागदेव द्वारा भी