खुली जेल में मौसम कैसा है

खुली जेल में मौसम कैसा है

खुली जेल में मौसम कैसा है
कैसे हैं दिन रात
बंदियों को ठीक से
नींद आती है या नहीं
क्या उनको सामना करना पड़ता है
असुविधाजनक सवालों का
किस तरह लड़ते हैं वे दुःस्वप्नों से
अतीत की तीखी यादों से
कितनी देर तक वे
दीवार से सर टकराते हैं
क्या खून बहने के बाद
वे गँवा देते हैं होश या
नींद की सुई उनके
दर्द को सोख लेती है

खुली जेल में मौसम कैसा है
क्या बंदी जानते हैं
किस गुनाह के चलते
उनको बंदी बनाया गया है
मौलिक अधिकारों को
किस एक्ट के तहत
एक ही झटके में
छीन लिया गया है
क्यों उनके पूर्वजों के
संघर्षों पर थूक-थूक कर
कीचड़ का डबरा तैयार किया गया है
मानव इतिहास की दास प्रथा को
कैसे नए सिरे से जीवित किया गया है
स्वयं को दास के रूप में
तब्दील होते हुए देख कर
क्या बंदियों को कोई
हैरानी हो रही है

खुली जेल में मौसम कैसा है
क्या अब भी बंदियों को लगता है
कि जिस जेल में उनको रखा गया है
पहले वह स्थान एक देश कहलाता था
जिसके आसमान में कभी
आजादी का परचम लहराता था।


Image : Self-Portrait
Image Source : WikiArt
Artist : Jean-Francois Millet
Image in Public Domain


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दिनकर कुमार द्वारा भी