तुम्हारा प्यार

तुम्हारा प्यार

तुम्हें कौन पूछता
तीस वर्षों बाद
तुम्हारे इन शब्दों का
क्या अर्थ समझूँ?
यही कि अहसान किया था
तुमने मुझ पर
और मैं समझती रही थी
तुमने मुझसे प्यार किया था
आज तुमने सच उगल दिया है
परंतु–
अब बहुत देर हो चुकी है
कैसे वे दिन वापस लाऊँ?
कैसे अपना सम्मान बचाऊँ?
मैंने तो तुम्हारे साथ प्यार किया था
विवाह का निर्णय लिया था
अपने माता-पिता के विरुद्ध जाकर
कि तुम स्त्री समानता के पक्षधर हो
तुम मुझे पूरा सम्मान दोगे
मैं गलत थी या तुम सही हो?
दोनों में से किसे सच मानूँ?
तुमने मेरे सम्मान की धज्जियाँ
शादी के तीन वर्ष बाद भी उड़ाई थीं
उस वक्त मैं अपने पिता के घर थी
तुम्हारे जूतों से मेरा सिर झन्ना गया था
तब भी तुमने माफ़ी माँगी थी
अपनी गलती पर
आज फिर तुमने अपनी
मानसकिता दिखा दी है
अब मैं क्या करूँ?
उस वक्त भी मजबूर थी एक माँ
आज फिर वही मेरी ममता
आगे आ रही मेरे सम्मान के बीच।



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रजतरानी मीनू द्वारा भी